मस्तिष्क रेखा के बारे में हमने पिछले अध्याय में जाना कि ये क्या होती है इसकी पहचान कैसे कर सकते हैं और व्यक्ति के जीवन में इसका क्या प्रभाव होता है और साथ ही जाना कि मस्तिष्क रेखा का क्या महत्त्व है हस्त रेखा शास्त्र में और इस अध्याय में हम जानेंगे कि मस्तिष्क रेखा से व्यक्ति के गुण-दोष कौन-कौन से होते हैं।
आइये जानते हैं मस्तिष्क रेखा की विभिन्न स्थितियां और उनके कारण व्यक्ति के गुण-दोष क्या-क्या हो सकते हैं –
# जीवन-रेखा को मंगल क्षेत्र से काटती हुई मस्तिष्क-रेखा हथेली के दूसरी तरफ जाती हो तो व्यक्ति अधिक कल्पनाशील होता है ऐसा व्यक्ति एकांत में रहना पसंद करता है और आत्मसम्मानी प्रवृत्ति का होता है लेकिन उसका सही उपयोग नहीं कर सकता। इनके काल्पनिक विचारों में बदले की भावना देखने को मिलती है वह व्यर्थ ही किसी व्यक्ति-विशेष की सलाह को या किसी बात को अपने विरुद्ध समझता है और इसके परिणाम स्वरुप चिड़चिड़ा होता जाता है। वह आवेश या गुस्से में और जल्दबाजी में आकर अपनी बात मनवाना चाहेगा और इसमें वह उचित-अनुचित को ध्यान में नहीं रखेगा। और उसके अधिक विरोध का भी यही कारण होगा। बनता हुआ काम बिगाड़ लेगा अतः ऐसा कह सकते हैं कि ऐसे व्यक्ति व्यर्थ में ही समय और धन का अपव्यय करने वाले होते हैं।
# जीवन रेखा को स्पर्श करती हुई या छूती हुई मस्तिष्क रेखा प्रारंभ हो तो व्यक्ति में तीव्र स्मरण शक्ति, निर्णय लेने की अच्छी क्षमता, अपनेपन की भावना और स्थिति के अनुसार अपने आप को समायोजित करने की क्षमता अधिक होती है। परन्तु वह अपने स्वार्थ की तरफ हमेशा सजग रहता है सही अर्थों में ऐसे व्यक्ति समयानुसार सही जगह निर्णय लेते हैं और किसी व्यक्ति-विशेष को अपनी राय सही समय पर ही देते हैं परिणाम स्वरुप इनकी प्रतिष्ठा में बृद्धि होती है। इनमे अपनत्व की भावना अधिक होने के कारण ये संकोचवश अपनी राय देना पसंद नहीं करते, इस रेखा का यही अवगुण है।
# मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा से मिलकर कुछ दूर चले और फिर अलग हो जाये तो ऐसे व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। साथ ही शारीरिक व मानसिक कार्य-क्षमता और स्थिति को परखने व सही समय पर जवाब देने की क्षमता भी अच्छी होती है। जिस आयु से मस्तिष्क-रेखा जीवन-रेखा से अलग होती है उस आयु से ही व्यक्ति के हृदय में परिवर्तन देखने को मिलता है और काल्पनिक विचारों में स्थिरता दिखती है परिणाम स्वरुप न चाहते हुए भी वह अच्छा या बुरा निर्णय ले लेता है और बाद में पश्चात्ताप उसे खलता रहता है कि उसने ऐसा निर्णय ले कर गलती की।
# जीवन रेखा से अलग हो कर मस्तिष्क रेखा का प्रारंभ होना व्यक्ति के स्वतंत्र विचार व अत्यधिक आत्मसम्मानी स्वाभाव को दर्शाता है। वह हर काम में स्वयं ही निर्णय लेना पसंद करता है न तो किसी से सलाह लेता है न ही सलाह देना पसंद करता है। ऐसे व्यक्ति स्वार्थी होते हैं। एकांत प्रिय और जल्दबाजी से निर्णय लेने की प्रवृत्ति की वजह से कई अच्छे अवसर हाथ से गवा देते हैं अतः ऐसा कहा जाता है कि ऐसे व्यक्ति झुकना पसंद नहीं करते चाहे वह टूट जाएँ।
# जीवन रेखा के ऊपर की ओर गोलाई लिए हुई अर्द्ध चंद्राकार आकार में मस्तिष्क रेखा हो तो ऐसे व्यक्ति विशेष रूप से कला प्रेमी होता है और सूझबूझ से अपनी कला का प्रदर्शन करता है व प्रतिष्ठा और मन-सम्मान प्राप्त करता है। ऐसी रेखा विशेष रूप से शिल्पकारों, चित्रकारों, संगीतज्ञों, कलाकारों और कवियों के हाथों में देखने को मिलती हैं।
# ऐसा व्यक्ति शांतिप्रिय व एकांत प्रिय होता है जिसकी मस्तिष्क रेखा शुरू से आखिरी तक बिल्कुल सीधी हो। और ऐसे व्यक्ति हमेशा प्राकृतिक सौन्दर्य को प्राथमिकता देते हैं।
# मस्तिष्क रेखा का आखिरी में चन्द्र पर्वत की और झुका हुआ प्रतीत होना यह दर्शाता है कि व्यक्ति कल्पनालोक में अधिक रहता है और उसमे सहनशक्ति कम होती है। इसलिए किसी काम को शुरू करने से पहले ही परिणाम सम्बन्धी निर्णय ले लेता है। यदि काल्पनिक विचारों में किसी को सहयोग प्रदान करने वाले या शुद्ध विचार हों तो निर्णय हमेशा किसी व्यक्ति-विशेष के साथ लाभप्रद समझोते का ही लेगा।
# मस्तिष्क रेखा चन्द्र पर्वत तक पूरी तरह समाप्त हो जाये तो व्यक्ति बहुत अधिक कल्पनाशील होगा और मन में नकारात्मक विचारों के साथ हमेशा कल्पनालोक में खोया रहेगा, परिणाम स्वरुप वह न तो समय पर कोई कार्य करता है और न ही समय पर निर्णय लेता है। फालतू में मानसिक शक्ति को खर्च करता रहता है।
# दोहरी मस्तिष्क-रेखा बताती है कि व्यक्ति में कार्य करने और निर्णय लेने की क्षमता अच्छी है। वह हमेशा वही योजनायें बनाएगा जिन्हें सुचारू रूप से क्रियान्वित कर सके। व्यक्ति हमेशा समय का सदुपयोग करने वाला और व्यर्थ के कामों में समय को बर्बाद नहीं करता। ऐसे लोगों का कार्य हमेशा संतुलित और विकसित होता है और साथ ही हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।
# चन्द्र क्षेत्र पर पहुँच कर मस्तिष्क रेखा दो भागों में विभाजित हो जाये तो व्यक्ति की सहनशीलता और कल्पनाशक्ति अच्छी होती है। ऐसे व्यक्ति कला-प्रेमी और बुद्धिमान होते हैं। प्रभावशाली व अच्छे लेखक के हाथ में भी ऐसी रेखाएँ देखने को मिलती हैं।
# मस्तिष्क रेखा का हथेली के मध्य दो भागों में विभाजित होना इस बात को दर्शाती है कि व्यक्ति में श्रृंगार-प्रियता एवं सौन्दर्य की प्रधानता है। लेखक या कवि के हाथ में ऐसी रेखा का होना यह बतलाता है कि वह श्रृंगार रस और प्राकृतिक दृश्यों पर कवितायेँ या लेख लिखता है।
# ह्रदय रेखा व मस्तिष्क रेखा के मध्य दूरी कम हो तो व्यक्ति के मस्तिष्क का झुकाव सिर्फ अपने स्वार्थ की तरफ होता है और वह इसके लिए किसी को भी धोका दे सकता है। ऐसे व्यक्तियों में आत्मसम्मान की भावना अधिक होती है परन्तु वह सहनशील नहीं होगा फलस्वरूप गुस्से में आ कर वह व्यक्ति-विशेष को प्रलोभन या लालच दे कर अपने स्वार्थ को सिद्ध करता है।
# लहरदार मस्तिष्क रेखा होएं पर व्यक्ति की कार्य के विषय में बुद्धि अस्थिर रहेगी। ऐसा व्यक्ति काल्पनिका विचारों में खोया रहता है और खुद के व्यर्थ ही मस्तिष्क रोग विकसित कर लेता है।
# मस्तिष्क रेखा का खंडित होना अर्थात कही भी टूट जाना यह बताता है कि जिस जगह रेखा टूटी है उस आयु में मानसिक कष्ट झेलना पड़ता है।
# मस्तिष्क रेखा सुन्दर व स्पष्ट हो परन्तु हथेली के मध्य भाग तक ही हो तो व्यक्ति व्यवसाय में और बौद्धिक व सांसारिक क्षेत्र में सफलता को प्राप्त करता है। उसका ध्यान हमेशा अपने लक्ष्य की तरफ होता है वह किसी अन्य क्षेत्र में अपना समय व्यर्थ ही बर्बाद नहीं करता।
# मस्तिष्क रेखा आधे चंद्राकार जैसी और गुरु पर्वत के नीचे दिखे तो व्यक्ति में अहंकार की भावना अधिक होती है फलस्वरूप वह फालतू में अच्छे अवसर हाथ से खो देगा।
# शनि पर्वत के निचले भाग से प्रारंभ होने वाली मस्तिष्क रेखा यह दर्शाती है कि व्यक्ति को आँखों की परेशानी है।
# ऐसा व्यक्ति भाग्यशाली होता है जिसकी मस्तिष्क प्रारंभ से ही दो शाखाओं में विभक्त हो जाती है और एक शाखा हृदय रेखा और दूसरी शाखा जीवन-रेखा को छुए। ऐसे व्यक्ति का निर्णय भी सभी को मान्य होता है।
# व्यक्ति व्यवसाय, विज्ञान व अनुसन्धान के कार्यों में विशेष रूप से सफल होता है यदि मस्तिष्क रेखा की कोई शाखा बुध पर्वत के क्षेत्र को छुए।
# ऐसे व्यक्ति को हर क्षेत्र में मान-सम्मान, यश व प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है जिनके हाथ की मस्तिष्क रेखा सूर्य पर्वत के क्षेत्र की तरफ झुकी हो और उसे छुए। साथ ही ऐसे व्यक्ति अपनी प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए हर कार्य को पूरा करते हैं।
# एकांत प्रिय और धार्मिक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति की मस्तिष्क रेखा शनि पर्वत को छूती है। साथ ही ये व्यक्ति संगीत व धार्मिक कार्यों में विशेष रूचि रखने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति कभी किसी भी कार्य में अपने हाव-भाव प्रकट नहीं होने देते इसलिए ऐसे व्यक्ति के बारे में राय देना मुश्किल होता है।
# मस्तिष्क रेखा गुरु पर्वत को छुए तो व्यक्ति आत्मसम्मानी और अपने प्रभुत्त को बनाये रखने की भावना वाला होता है।
# मस्तिष्क रेखा चन्द्र पर्वत को छुए तो ऐसे लोग काल्पनिक विचारों में खोये रहने वाले होते हैं और गुप्त विद्याओं व ललितकलाओं का ज्ञान रखता है।
# मस्तिष्क रेखा का प्रथम मंगल क्षेत्र को छूना इस बात को दर्शाता है कि व्यक्ति आत्मसम्मानी होता है। वह झुकना पसंद नहीं करेगा चाहे टूट जाये और इसी आदत के कारण व्यक्ति को बहुत कष्टों का सामना करना पड़ता है।
इन दो अध्यायों में हमने मस्तिष्क रेखा को विस्तार से जाना और साथ ही जाना कि व्यक्ति के जीवन में इसका क्या महत्त्व है इसकी विभिन्न स्थितियों की आधार पर व्यक्ति में क्या गुण-दोष हो सकते हैं। हस्त रेखा विज्ञान यहाँ विस्तारपूर्वक मस्तिष्क रेखा के बारे में जाना।
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