हथेली पर चन्द्र-पर्वत मन, कल्पनाशक्ति, बुद्धिमत्ता, संपदा, धन, स्त्री, कृषि, साहित्य व कविता में अभिरुचि, प्राकृतिक सुन्दरता, एकांत-प्रियता, व्यवसाय की ओर झुकाव और यात्रा-प्रवृत्ति का संकेतक होता है।
इस पर्वत का अच्छा प्रभाव होने पर व्यक्ति पुष्ट अंगो वाला, सुन्दर, गोल आकार वाला, लोगों की भावनाओं का सम्मान करने वाला, व्यवहार कुशल और कम बोलने वाला होता है और ऐसे व्यक्ति को आयु के 22 से 25 वर्ष में शुभ फल प्राप्त होता है।
यदि इस पर्वत का प्रभाव अच्छा नहीं होने पर व्यक्ति की बुद्धि अस्थिर, मानसिक रोगी, वासना में विलीन और एकांत में रहता है।
• चन्द्र-पर्वत का अत्यधिक उन्नत होना व्यक्ति की कल्पनाशक्ति और लेखन शक्ति की तीव्रता को दर्शाती है। व्यक्ति एकांत-प्रिय और अपने काल्पनिक विचारों में खोया रहता है परिणामस्वरूप उसका काम पूर्ण होने में अनावश्यक देरी होती है।
• सामान्य रूप से उन्नत चन्द्र पर्वत दर्शाता है कि व्यक्ति एकांत में रहना पसंद करता है और शांति-प्रिय है। लेखन कार्य में विशेष रुचि रखता है और अपने कार्य को प्राथमिकता देता है। इन्हे यात्रा करना पसंद होता है।
• चन्द्र पर्वत निर्बल हो या उसकी ऊँचाई कम हो तो व्यक्ति कल्पनाशक्ति में शून्य होता है फालतू के तर्क और हवाई किले बनाने की आदत बन जाती है और हर क्षेत्र में असफल रहता है।
• इस पर्वत का झुकाव मणिबंध या कलाई की तरफ हो तो व्यक्ति व्यर्थ के कल्पनालोक में खोये रहते हैं और धन व समय दोनों ख़राब करते हैं।
• अर्धचन्द्र की आकृति अगर चन्द्र पर्वत पर स्थित है तो यह व्यक्ति के लिए शुभ होता है। ये लोग शांत और धार्मिक स्वाभाव के होते हैं एवं अपने आप को समय और परिस्थितियों के अनुसार समायोजित करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे व्यक्ति को हर बात का पहले से ही अनुमान लग जाता है।
• चन्द्र पर्वत के साथ शुक्र पर्वत भी उन्नत होने पर व्यक्ति विश्वासपात्र होता है ऐसे व्यक्तियों के प्रशंसक और मित्र अधिक होते हैं। कलात्मक प्रवृत्ति, विनोदप्रिय और अच्छा प्रेमी होना इन व्यक्तयों के गुण होते हैं।
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